जय माता सरस्वती
गीतकार यादव राज
जातानी दूर हो बानी मजबूर हो
बाक़ी ना बाटे एहीमें हामार क़सूर हो
कहिय ना प्यार में ओकरा घुल जईबू हो
जाके ससुरवा.
अन्तरा
भूलब ना तोहके केतनो सुख सईया दिहे हो
देह भले ओहिजा रही देह रही इहे हो
कहला आ कईला में होला बड़ी अंतर रामा
सारा क़सम वादा जाते हो जाई छु मंतर रामा
कह मत जाके ओहिजा फ़ुल जईबू हो
जाते ..
अंतरा -
साच कही तोहसे मान बात मोर विशाल हो
संगे तोहरा हम कवनो चलत नईखी चाल हो
यादव राज के जब लगे तू जइबू ए रामा
जानतानी हम तू त उनके हो जईबु ए रामा
सोच जनि हाथ से बिच्छूल ज़ईबू हो
जाते ..