ZAKHM-文本歌词

ZAKHM-文本歌词

Mr.Deepak Saini
发行日期:

Zakhm De Gaya

मिस्टर दीपक सैनी

[संगीत

नहीं था तेरे बस का झूठे वादे क्यो किये,

यदि साथ नहीं देना था साथ फेरे क्यों लिए,,

नहीं था तेरे बस का झूठे वादे क्यो किये,

यदि साथ नहीं देना था साथ फेरे क्यों लिए,,

झूठी तेरी बातों को मैं सच मान बैठा,

रब दी कसम तुझे रब मान बेठा,,

तू मेरी हीर थी और मैं तेरा रांझा,

फिर भी ये प्यार वाली जंग हार बैठा,,

जंग हार बैठा, जंग हार बैठा...

जख्म दे गया मैंने जिसको बसाया था दिल में,

गैरों का हो गया मैंने जिसको बसाया था दिल में,,

जख्म दे गया मैंने जिसको बसाया था दिल में,

गैरों का हो गया मैंने जिसको बसाया था दिल में,,

[संगीत

तू तो चाहे छुटकारा पर मैं कैसे छोड़ दूं,

जनम जनम का ये रिश्ता बता कैसे तोड़ दूं,,

तू तो चाहे छुटकारा पर मैं कैसे छोड़ दूं,

जनम जनम का ये रिश्ता बता कैसे तोड़ दूं,,

तेरे लिए कहना ये सब बहुत ही आसान है,

जैसे कि ये रिश्ता कच्चे धागे के समान है,,

मैं तो प्यार सदां तुम्हें करता ही रहूंगा

जब तक ये धरती और नीला आसमान हैं,,

नीला आसमान हैं, नीला आसमान हैं...

जख्म दे गया मैंने जिसको बसाया था दिल में,

गैरों का हो गया मैंने जिसको बसाया था दिल में,,

जख्म दे गया मैंने जिसको बसाया था दिल में,

गैरों का हो गया मैंने जिसको बसाया था दिल में,,