-文本歌词

-文本歌词

发行日期:

पपीहे की पुकार सुन, मन मेरा भरमाए,

बिन तेरे सावन की ये रुत, कैसी तड़प बढ़ाए।

सुन, प्रिय, इन घटाओं से, पूछ रहा हूँ मैं,

तू कहाँ, ये धरती, अम्बर, हर ओर तुझे ही चाहे।

पिया, मैं भी सुनती हूँ, इन पपीहों की पुकार,

तेरी यादों का सावन, बरसे हर बार।

बांध लूँ मैं बादल को, रोक लूँ हवाओं को,

तेरी बाहों के सिवा, कहाँ चैन पाऊं मैं।

संग-संग ये दिल धड़कें, जैसे बांसुरी की तान,

पपीहा बनकर गाए, हमारे प्रेम की पहचान।

झील के किनारे आ, ये लहरें तुझे बुलाए,

तेरे कदमों की आहट पर, फूल भी मुस्कुराए।

कुंज गलियों में चल, जहाँ पवन भी गाए,

हर पत्ता, हर कली, तेरा नाम दोहराए।

ओ पिया, तेरे संग ये जीवन संगीत बने,

पपीहे की पुकार से प्रेम की गाथा चले।

तू आ जाए, तो ये मौसम बहार लाए,

तेरी मेरी प्रेम कहानी, सदियों तक गूंजे।

सावन की ये बूँदें, गाए राग मल्हार,

पपीहे की पुकार में छुपा प्रेम का सार।

धरती और अम्बर का संगम हो जाए,

हमारा ये प्यार, हर जीवन गुनगुनाए।