जब भी मैं देखूँ तुझे तो रह जाता हूँ दंग
कहना मैं चाहूँ तुझसे हाँ मुझे,रहना तेरे संग
पर कह न मै पाऊँगा तेरे आगे काँपे हम
बड़ी मुश्किल है यहां पर,कैसे मिल पाएंगे हम
ये जन्म हो सफल
तू मिले तो मिले हल
मेरे हर सवाल का
तू ही मेरा आज तू ही कल
तू ही लगे असल
तू आईना मेरे ख्याल का
तू केहदे तो मैं ले आऊँगा चाँद तारे भी
तू बोले जब बात करते हैं नजारे भी
तेरे जैसे ही दिखते हैं चेहरे मुझे सारे ही
मैं सोचूँ तेरे बारे ही बस सोचूँ तेरे बारे ही
मेरा ये सब कुछ है तेरे लिए
तु ही तो सबकुछ है मेरे लिए
कैसे बताऊँ तुझे अब मे ये
क्या है तु मेरे लिए
इल्तिजा है तू meri , आशियाँ है तू
बेइंतिहा किसी ख़ुमार की तरह है तू
मेरी खामोशियो की ज़ुबाँ है तू
मै नही हूँ मुझमे ऐसे रह रहा है तू
तेरा मिलना ऐसा है जिसपे यंकी
कर न पाउँगा मैं सारी जिंदगी
एक सफर हो जिसकी हो न मंजिले
तू साथ है तो हर मौसम हंसी
तेरा मिलना ऐसा है जिसपे यंकी
कर न पाउँगा मैं सारी जिंदगी
एक सफर हो जिसकी हो न मंजिले
तू साथ है तो है हर मौसम हंसी
तू जब भी होता नही
ऐसा कभी होता नही
हर शाय में तू ही दिखे
दिखे न तू जँहा
वँहा मैं भी होता नही
मिलकर जैसा तुझसे होता मुझे
ऐसा मिलकर किसी से भी होता नही
मेरे ख्वाबो को देदे पनाह
रातो को मे अब सोता नही
मुझको रही न कुछ मेरी ख़बर
बच्चे जैसा ये दिल मेरा बेसब्र
तू आती है जाती है रहजाती,
बातें जो कहनी है थोड़ा ठहर
मेरा हाथ पकड़ले,खो न जाऊँ मैं कंही
खुदसे भी ज्यादा चाहूँ तुझे तू कर यंकी
दुनिया से क्या लेना ये तो है मतलबी
आखिर तक मुझको बस रहना तेरा ही
तेरा मिलना ऐसा है जिसपे यंकी
कर न पाउँगा मैं सारी जिंदगी
एक सफर हो जिसकी हो न मंजिले
तू साथ है तो है हर मौसम हंसी
तेरा मिलना ऐसा है जिसपे यंकी
कर न पाउँगा मैं सारी जिंदगी
एक सफर हो जिसकी हो न मंजिले
तू साथ है तो है हर मौसम हंसी
Raat aur bhi khoobsurat ho sakti hai
Baat or bhi ye khoobsurat ho sakti hai
Kaynaat ho sakti hai ghazal koi
Sath tere aur bhi khoobsurat ho sakti hai