परधकरण
यह हर पर इलय और जरन ह ।
आप ज कर रह ह उसम मझ कई कररवई य उततर नह दख रह ह ।
यह कई नह दत य मफ नह मगत, कवल घमड ह रज करत ह ।
दनय उलट ह गई ह । यह दनय क बर म शबद ह, लकन यह ढह रह ह । करम आत ह, हलक दर स, लकन समय क सथ । लकन म तमहर लए स नह दग। अब उस परकश क परतकष कर ज वशवस दवर बनए गए इकन । जतन अधक म भख रहत ह, उतन ह म कचड स उठत ह । हर कई जलद म ह - फर व कटत ह । इस एक सबक क रप म उपयग कर, आहर क रप म - इस अवशषत कर । दसर क गलतय क न दहरए । एक दसर क भरम म न दख । गत क चर ओर क गदग क लए एक उपय क रप म सन । मन सगत म इतन कचर कभ नह दख । यह वकलप अवध ह और यह मरत ह । और वह कहत ह क हम कस क जररत नह ह ज कवल परतय । उनह कह और सफलत क तलश करन द! म पहल स ह इन मग और नकल मसक स थक गय ह ।
व कस और क हन क दखव करत ह, बस कपड और टरड सनकरस क सथ!
इलय और जरन - त जद कम पर ह!
हमर सबध क कई तड नह सकत ।
महमर चर ओर ह, और म बन हडबड क सफलत क परतकष कर रह ह ।
आप इतन हममत स अदर आत ह ।
म एक सयरन क तरह ह, उनक भवनओ क चतरत करत ह
जब व लइन अप करग, त व दख हग ।
म उन लग क मनरजक लगत ह
म कस पकड रह ह, व पछत ह, कयक म अपन मखट क नच सबस जयद महसस करत ह ।
भगवन न आपक भयकर बनय और आपक हलक क तरह लय ।
मन अपन रकषस क उनक अत तक, एक घतक परणम क लए जगय ।
आपक सभगय यह ह क मर गगसटर पयर करत ह जब दरद आपक घर लत ह ।
सतत क भख सनक क खन बहन पर शबद अधक आहत हत ह ।
लकन व अपन सहसन पर एक अलग नम दखन चहत ह ।
और गणत जड नह ह ।
व मर चल क अनमन लगन क कशश करत ह ।
य आख कवल अधक सफल हन क सपन दखत ह ।
मर लए कछ भ नह ह यह उनक लए ह
अतरकक उततर मर पयर ।
कय यह सब वसतवक ह, य यह सरफ एक सपन ह?