युगों युगों के बाद आया है अवसर फिर से वही साधु, संतों और भक्तों से भरी है प्रयाग नगरी महा कुंभ है महा कुंभ है महा कुंभ है महा कुंभ है महा कुंभ है महा कुंभ है बरसाया अमृत देवो ने पावन त्रिवेणी धारा में मात गंगे ने छू कर कितनों के मन को तारा है बरसाया अमृत देवो ने पावन त्रिवेणी धारा में मात गंगे ने छू कर कितनों के मन को तारा है hookline मन के पापो से हो मुक्ति है मोक्ष का ये आरंभ है मोक्ष का ये आरंभ यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है stanza तन से मन तक पावन हो जो भी जन कुंभ में आए सारे पाप निचोड़े जो भी दिल से डुबकी लगाए हाँ महाकुंभ का शंख नाद जो फिर एक बार हुआ हैं है चक्र ये बारह वर्षों का फिर पूरा आज हुआ है Hook line आहुति पापो की देकर पुण्य का भर ले कुंड यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है Stanza अमृत की बूंदे छलकाई देवो ने धरती पर पावन हो गई धाराए सब अमृत जल को पीकर गोदावरी गंगा और क्षिप्रा से सब मुक्ति है पाते है अमृत की लहरों में अपने मन का मेल बहाते hookline धर्म का सूरज आते ही छट जाती सारी धुंध यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है Stanza महाकुंभ है मेला सच्ची श्रद्धा का प्रमाण है ये धरोहर सनातनी हर हिंदू का अभिमान हर तरफ़ है हर हर की वाणी जो गूँजे है संतों की है तप का ये त्यौहार बड़ा है भीड़ यहाँ भक्तों की Hook line माया के पिंजरे का तू तोड़ के आजा बंध यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है यहीं कुंभ है, यहीं कुंभ है, महा कुंभ है….